द्रौपदी मुर्मू टीचर से लेकर राष्ट्रपति का सफर Draupadi Murmu Biography in Hindi

Draupadi murmu Biography in Hindi: आजाद भारत के 75 साल के इतिहास में पिछले डेढ़ दशक महिलाओं के लिए खास शाबित हुए है। इस दौरान, जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने वाली महिलाएं देश के शीर्ष संवैधानिक पद तक पहुंचने में सफल रहीं. 2007 में प्रतिभा देवी सिंह पाटिल के देश की पहली महिला राष्ट्रपति बनने के बाद, द्रौपदी मुर्मू ने देश की लोकतांत्रिक परंपरा का सुंदर उदाहरण दिया है। क्या कभी किसी ने सोचा था कि द्रौपदी मुर्मू ने दिल्ली से दो हजार किलोमीटर दूर ओडिशा के मयूरभंज जिले की कुसुमी तहसील के छोटे से गांव उपरबेड़ा में एक अत्यंत साधारण स्कूल से पढ़ाई की थी।

नाम द्रौपदी मुर्मू
जन्म तिथि 20 Jun 1958
जन्म स्थान बइदापोसी गाँव, मयूरभंज, ओडिशा
शिक्षा ग्रेजुएट
व्यवसाय शिक्षक, सामाजसेवी, राजनेता
पति का नाम स्व. श्याम चरण मुर्मू
पति का व्यवसाय बैंक कर्मचारी
पार्टी का नाम भारतीय जनता पार्टी
धर्म हिन्दू

जन्म, आयु और परिवार

द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के बैदापोसी गांव के एक संथाल परिवार में हुआ था उनके पिता का नाम बिरंचि नारायण टुडु है। उनके दादा और पिता दोनों उनके गाँव के प्रधान रह चुके है द्रौपदी मुर्मू अपने जिले के कुसुमी तहसील के गांव उपरबेड़ा में स्थित एक सरकारी स्कूल से पढ़ी हैं। इनके पति का नाम श्याम चरण मुर्मू था इनके तीन संतान दो बेटे और एक बेटी थी लेकिन अपने पति और दोनों बेटो की मृत्यु के बाद उन्होंने अपने ही घर में बच्चो को पढ़ाने के लिए एक बोर्डिंग स्कूल खोल ली थी उनकी केवल पुत्री जिन्दा है जिसकी शादी हो चुकी है और वह भुवनेशवर में रहतीं है।

द्रौपदी मुर्मू की शिक्षा

द्रौपदी मुर्मू का जीवन बड़ी कठिनायों में बिता है उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मयूरभंज के के. बी. हा. से. से की थी जब वह सातवीं कक्षा में पहुंची तो उनके गांव में आगे की पढाई के लिए कोई स्कूल नहीं था भी तभी उनके गांव में उड़ीसा के कई बड़े सरकारी अफसरो और मंत्रीयो का दौरा हुआ मुर्मू ने उनसे आगे की पढाई करने के लिए अनुरोध किया और उसके बाद सरकार के द्वारा उनका एडमिशन रमादेवी वूमंस कॉलेज, भुवनेश्वर में  करवा दिया गया।

उड़ीसा के गवर्नमेंट बिजली डिपार्टमेंट में इन्होने जूनियर असिस्टेंट के तौर पर नौकरी की यह नौकरी उन्होंने 1979 से लेकर सन 1983 तक की थी। उसके बाद रायंगपुर में १९९४ में इंटीग्रल एजुकेशन सेंटर में टीचर की नौकरी की और यह नौकरी उन्होंने 1997 तक की थी और उसके बाद वह १९९७ में राजनीती की तरफ आ गयी।

पति और बेटों के निधन के बाद घर में स्कूल बना दिया

द्रौपदी मुर्मू का विवाह श्याम चरण मुर्मू से हुआ था। उनके दो बेटे और एक बेटी हुई लेकिन २५ वर्षीय बेटे की असमय मृत्यु हो गयी और उसके कुछ दिन बाद ही दूसरे बेटे की भी २०१३ में सड़क हादसे में मौत हो गयीऔर उसके साथ ही उनकी माता का भी स्वर्गवास हो गया एक ही महीने में तीन मृत्यु हो गयी। वह इस दुःख से उभरी ही थी की २०१४ में उनके पति की भी मौत हो गयी उसके बाद उन्होंने अपने घर को बोर्डिंग स्कूल बना दिया और वह आज भी स्कूल ही है और वहां बच्चे पढ़ने आते है।

द्रौपदी मुर्मू के जीवन में संघर्ष

द्रौपदी मुर्मू ने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया है लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी भगवान ने उनकी हर मोड़ पर बहुत ही कठिन परीक्षा ली जिसके कारण वह बहुत ज्यादा डिप्रेशन में भी चली गई थी।

डिप्रेस्शन का कारण था उनके २५ वर्षीय बेटे की असमय मृत्यु हो जाना वह इस हादसे से उभरी ही थी की दूसरे बेटे की २०१३ में सड़क हादसे में मोत हो गयी जिसके चलते डिप्रेशन से मुक्ति लेने के लिए उन्होंने अध्यात्म का सहारा लिया। और ब्रह्मकुमारी संस्था से जुड़ गयी।

दोनों बेटों की मौत से वह उभरी ही थी की उनकी मां की भी मृत्यु हो गई इस प्रकार उन्होंने एक ही महीने में अपने परिवार के तीन सदस्यों को खो दिया इन सभी दुखो को मुर्मू थोड़ा संभाल ही पाई थी की उनके ति श्याम चरण मुर्मू का 2014 में निधन हो गया।

इतनी कठिनाइयों के बाद भी द्रोपदी मुर्मू ने हार नहीं मानी और ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़ने के बाद योग की शुरुआत की और अपने सामान्य जीवन को वापस ले आई।

द्रौपदी मुर्मू का राजनितिक जीवन

मुर्मू पहले एक अध्यापक थी लेकिन उन्होंने 1997 में अपने राजनितिक जीवन की शुरुआत की और उन्होंने अपने करियर की शुरुआत भाजपा से जुड़कर की थी उन्होंने अरबिंदो इंटीग्रल एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर मैं सहायक  प्रोफ़ेसर और उड़ीसा सिंचाई विभाग के जूनियर सहायक के रूप में काम किया था झारखंड की पहली महिला राज्यपाल भी द्रोपदी मुर्मू ही थी।

जब मुर्मू भाजपा में शामिल हुई तो उन्हें नगर पंचायत की तरफ से पार्षद चुना गया और 2000 मैं रायरंगपुर की नगर पंचायत की अध्यक्ष बनी। वर्तमान में द्रोपदी मुर्मू भारत की राष्ट्रपति है वह भारत की पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति बनी है।

उसके बाद वह राष्ट्रपति बन गयी और दुनिया भर के लोगो ने उनकी जीत की सरहाना की अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने सन्देश में कहा की एक आदिवासी महिला का राष्ट्रपति जैसे पद पर पहुंचना भारतीय लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि मुर्मू का निर्वाचन इस बात का प्रमाण है कि जन्म नहीं, व्यक्ति के प्रयास उसकी नियति तय करते हैं। वही ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा की द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्र प्रमुख पद पर पहुंचना उनकी ऊंची शख्सियत का ही परिणाम है।

फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने भी मुर्मू को राष्ट्रपति बनने पर बधाई दी वही नेपाल के राष्ट्रपति ने भी मुर्मू को राष्ट्रपति बनने पर बधाई दी।

जन्म, आयु, कारावास तथा मृत्यु Bhagat Singh Biography

द्रोपति मुर्मू भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति

द्रोपति मुर्मू २०२२ में भाजपा के नेतृत्व में राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार के लिए नामांतरण किया था। उस समय कांग्रेस के नेत्तृव यशवंत सिन्हा कर रहे थे लेकिन अपनी मेहनत और महान कार्य करने के लिए उन्हें भारत की प्रथम महिला आदिवासी समुदाय से होने वाली राष्ट्रपति चुना गया।

द्रोपदी मुर्मू को प्राप्त पुरस्कार

द्रोपदी मुर्मू को वर्ष २००७ में नीलकंठ पुरुष्कार मिला था उन्हें यह पुरुष्कार सर्वश्रेष्ठ विधायक के रुप में मिला था।  यह पुरस्कार उन्हें उड़ीसा विधानसभा के द्वारा मिला गया था।

Draupadi Murmu Biography in Hindi FAQ’s

द्रौपदी मुर्मू के कितनी संतान थी ?

दो बेटे और एक बेटी

झारखंड की पहली महिला राज्यपाल कौन है?

द्रौपदी मुर्मू

द्रोपदी मुर्मू का जन्म कब हुआ था?

20 जून 1958

द्रौपदी मुर्मू के पति का नाम क्या है?

श्याम चरण मुर्मू

द्रौपदी मुर्मू कौन है?

भारत की प्रथम आदिवासी  महिला राष्ट्रपति है

द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति बनने से पहले क्या थी ?

राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार होने से पहले, वह झारखंड की राज्यपाल और ओडिसा सरकार की मंत्री थी।

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